Thursday, 28 August 2025

मनुस्मृति क्यों जलाई गई

सत्यासत्यवस्तुविवेकः। इहामुत्रार्थफलभोगविरागः। अवैरमेव सत्यं सनातनं वैरमेवाsसत्यमसनातनम्। अत एव अम्बेडकरः असत्यं असनातनं मतं अग्नये अर्पितम्।
सत्य और असत्य की समझ विवेक है। लौकिक और पारलौकिक भोग-विलास का त्याग ही विरक्ति होती है। दुश्मनी का अभाव अर्थात् प्रेम व बन्धुत्व ही शाश्वत सत्य है, और वैरभाव ही अशाश्वत व असत्य है। इसीलिए आंबेडकर ने असत्य और अशाश्वत सिद्धांत को अग्नि में समर्पित कर दिया।।rg

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