जो समाज से मिला वह हम हो गए।
फैशन में है सो बात में है।
फैशन में नहीं तो चर्चा में नहीं है।
टीचिंग, रिसर्च, एक्सटेंशन
हर चीज के लिए अतीत की ओर देखते हैं
इतिहास वर्तमान सुधार के लिए।
जबाव खोजने की प्रक्रिया बन्द तो हमारा जीना बन्द।
समुदाय विविधता बिना कैसे?
समाज ही शिक्षा तय करता है, शिक्षा ही समाज तय करता है।
संवैधानिक मूल्य समता, स्वतन्त्रता, न्याय, बन्धुत्व
व्यष्टि से समष्टि की तरफ बढ़ना पड़ेगा
दिल की आवाज को सुन के देखो
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