लोग बहला दिए गए।
एकलव्य का अंगूठा कटा
लोग बहला दिए गए।
बाबा साहेब हराये ग्रे
लोग बहला दिए गए।
आरक्षण पर वार हुआ
तब भी बहलाए गये।
आरक्षण हटाया जा रहा है
लोग बहलाये जा रहे हैं
जातंकी हमलावर रहता
अब भी हम रक्षात्मक हैं।
निवेदन नहीं स्वीकार उन्हें
हम निवेदन क्यों करते?
बकरियां जान लें कि
भेड़िए निवेदन नहीं सुनते।
No comments:
Post a Comment