उसने मुझे यूं तो न छूकर भी
छुआ है कुछ इस तरह कि
नेक इरादे रूह को छू गये।
उसकी निगाहों की नेकी ने छुआ।
उसकी नेक ख्याली ने छुआ।
गंभीर सांसों ने छुआ।
शोख अदाओं ने छुआ।
उसने मेरी आँखों के पानी को स्पर्श किया है
मेरा दर्द अपनाने से
उसने मेरे लबों को स्पर्श किया है
अपनी प्यारी मुस्कान से
उसने मेरी रगों को स्पर्श किया है
लहु बनकर दौड़ने से
उसने मेरे अंतर्मन को स्पर्श किया है
अपने सहृदय व्यवहार से
राज..!! Rooh-E-Zindagi