Sunday, 28 March 2021

करतले हृदयम्।

अक्षिघातन्ते
तत्पुस्तकस्थपत्रं
ह्लादयत: माम्।

ते रक्ताङ्किन्या
नौचित्रिते हृदये
मे करतले।

स्पन्दत्यद्यापि
ते कपोलालिंगनं
मे कपोलयो:।

अधरचिह्नं
नौ मनस्यालोकति 
नौ ह्लादयति।

तव दर्शनं
मे लिखिनी कर्तनं
नावाह्लादम्।




होलिका दहन नहीं होरी उत्सव

लोग जुटाते लक्कड़
कंडे, बरबूले झक्कड़।
फटे-पुराने कपड़े लत्ता
कालिख सफेदा रंग।

भांग, गांजा, मदिरा
मुर्गा, वकरा, टिक्कड़।
पान, लोंग, लायची
नगाड़े तासे और मृदंग।

टोलियां बना-बना गईं
रात होत निकलें सब।
बालियां ले - ले हाथ
होरा भूंजन होरी जंग।

ले-ले आग होरी की
घर-घर होरी बरी।
गकरियां बनें घर
राख टीकत अंग।

मीठा मांगत भौजी
देवर जान छुड़ावत।
एक-दूजे मल गुलाल
करें मजाक सब संग।

खा-पीकर निकरे
करन मौज-मस्ती।
मर्यादा सारी भूले
करन लगे हुड़दंग।

विवेक शून्य सब
फाग राग में गारी।
जो कोई मिले गैल में
मर्यादा सारी भंग।

लखत सब साधु जन
कहत बुला परिजन।
आओ सब अंदर बैठो
बाहर होत बहुत हुड़दंग।
    
बन्द करो द्वारे सब
बाहर मचत उत्पात।
बंद करो खिड़कियां
उत्पाती पिएं हैं भंग।

गीत नहीं गालियां हैं
गलियां बनी नालियां।
स्त्री अस्मत ताक रहा
का-पुरुषों का हुड़दंग।

कालिख, सफेदा ले
मुंह पर मलते बेढंग।
अश्लील भाषा इनकी
अश्लील भाव-भंग।

करने को आतुर जे
नवल वस्त्र बदरंग।
मनमानी करने दो
या फिर होगी जग।

दूषित मन, दूषित तन
दूषित गुलाल - रंग
लगे रंग-रोग छूटे नहीं 
खुजलावत हर अंग।

कषि उत्सव रहा नहीं
दहन उत्सव हो चला है।
स्त्री दहन का मजा लेना
कर देता है मेरा मन भंग।

स्त्री अस्मत लूटने वालोें
मत जलाओ स्त्री को।
उत्सव लूटने का नहीं
पाने की होती है उमंग।

किसान घर अन्न आये
प्रथम अन्न पकाया जाये।
भुना अन्न होरा होता है
भूनने की क्रिया है होरी।

पोंगों की बातें छोड़ो,
होलिका को न जोड़ो।
वो स्त्री थी साहसी थी
शहीद हुई नमन् उसको।





Saturday, 27 March 2021

शराबी

आंखों गुलाल चढ़ आया है,
होठों पर फाग चढ़ आया है,
थर-थर थिरक रहे हैं पैर तेरे,
सराबोर! पीके कहां आया है?

सेनेटाइजर

आंखें तेरीं लाल हैं,
फिसलन भरी चाल है,
चूर-चूर होते शब्द हैं
सेनेटाइजर का कमाल है।
या मदिराशुभासीन्नु,
साद्य गंगाजिता शुभा।
ये यां पश्य पलायन्ते,
लालायन्तेsद्य देवता:।।

जो शराब अशुभ थी
वो गंगाजीत चुकी है।
जो भागते थे देख उसे,
वो सेनेटाइजर चाहते हैं।

सर्वेषां दिवसा: भूमौ
भवन्ति न सदा समा:।
सुरा नवावतारेsद्य,
 सेनेटाइजर ज्ञिता।।

सुना था सबके दिन फिरते हैं,
देख, शराब नये अवतार में हैं।
(सेनेटाइजर में अल्कोहल है।
आज अल्कोहल ही हल है।)

संदेशं प्रकृतेः ब्रूते, कोरोना जगति भ्रमन् ।
संहारे तव संहारः, रक्षा ते रक्षणे नु मे।।
रामहेत गौतमः

मदिरा

या मदिराशुभासीन्नु,
साद्य गंगाजिता शुभा।
ये यां पश्य पलायन्ते,
लालायन्तेsद्य देवता:।।
तां तु ते।।
सुधामिव।
चातका:।

Thursday, 25 March 2021

मातरो बोधयन्तु तान्

नग्नदेहाः भ्रमन्ता: ये
हट्टशालासु कामुका:।
निर्लज्जता न स्वातन्त्र्यं
मातरो बोधयन्तु तान्।।🙏
Rg

Monday, 15 March 2021

मंदिरे मुस्लिम रे!

जलं पिवति,
नाम न नदति भो!
गृहं गच्छति,
धर्मापराध: जातं,
तृषा बाधते,
मंदिरे मुस्लिम: रे!
दण्डयाम: नु,
वयं धर्म-रक्षका:।

गौतमरामहेत: