Wednesday, 1 May 2019

मजदूर दिवस

1 मई...मज़दूर दिवस और अम्बेडकर
सोशल मीडिया से साभार

बाबा साहेब अम्बेडकर के श्रमिक वर्ग के उत्थान से जुड़े अनेक पहलूओं को भारतीय इतिहासकारों और मजदूर वर्ग के समर्थकों ने नज़रंदाज़ किया है । जबकि अम्बेडकर के कई प्रयास मजदूर आंदोलन और श्रमिक वर्ग के उत्थान हेतु प्रेरणा एवं मिसाल हैं । आईये , आज मज़दूर दिवस के अवसर पर बाबा साहेब के ऐसे ही कुछ प्रयासों पर नज़र डालते हैं -

1. बाबा साहेब वाइसरॉय के कार्यकारी परिषद के श्रम सदस्य थे । उन्‍हीं की वजह से फैक्ट्रियों में मजदूरों के 12 से 14 घंटे काम करने के नियम को बदल कर  8 घंटे किया गया था ।

2. बाबा साहेब ने ही महिला श्रमिकों के लिए मातृत्व लाभ जैसे कानून बनाने की पहल की थी ।

3. बाबा साहेब ने 1936 में श्रमिक वर्ग के अधिकार और उत्थान हेतु ‘इंडिपेन्डेंट लेबर पार्टी’ की स्थापना की ।  इस पार्टी का घोषणा पत्र मजदूरों , किसानों , अनुसूचित जातियों और निम्न मध्य वर्ग के अधिकारों की हिमायत करने वाला घोषणापत्र था ।

4. बाबा साहेब ने 1946 में श्रम सदस्य की हैसियत से केंन्द्रीय असेम्बली में न्यूनतम मजदूरी निर्धारण सम्बन्धी एक बिल पेश किया जो 1948 में जाकर  ‘न्यूनतम मजदूरी कानून’ बना ।

5. बाबा साहेब ने ट्रेड डिस्प्यूट एक्ट में सशोधन करके सभी यूनियनों को मान्यता देने की आवश्यकता पर जोर दिया । 1946 में उन्होंने लेबर ब्यूरो की स्थापना भी की ।

6. बाबा साहेब पहले व्यक्ति थे जिन्होंने मजदूरों के हड़ताल करने के अधिकार को स्वतंत्रता का अधिकार  माना और कहा कि मजदूरों को हड़ताल का अधिकार न देने का अर्थ है मजदूरों से उनकी इच्छा के विरुद्ध काम लेना और उन्हें गुलाम बना देना । 1938 में जब बम्बई प्रांत की सरकार मजदूरों के हड़ताल के अधिकार के विरूद्ध ट्रेड डिस्प्यूट बिल पास करना चाह रही थी तब बाबा साहेब ने खुलकर इसका विरोध किया ।

7. बाबा साहब ट्रेड यूनियन के प्रबल समर्थक थे । वह भारत में ट्रेड यूनियन को बेहद जरूरी मानते थे । वह यह भी मानते थे कि भारत में ट्रेड यूनियन अपना मुख्य उद्देश्य खो चुका है । उनके अनुसार जब तक ट्रेड यूनियन सरकार पर कब्जा करने को अपना लक्ष्य नहीं बनाती तब तक वह मज़दूरों का भला कर पाने में अक्षम रहेंगी और नेताओं की झगड़ेबाजी का अड्डा बनी रहेंगी ।

8. बाबा साहेब का मानना था कि भारत में मजदूरों के दो बड़े दुश्मन  हैं - पहला ब्राह्मणवाद और दूसरा पूंजीवाद । देश के श्रमिक वर्ग के उत्थान के लिए दोनों का खात्मा जरूरी है ।

9. बाबा साहेब का मानना था कि वर्णव्यवस्था न सिर्फ श्रम का विभाजन करती है बल्कि श्रमिकों का भी विभाजन करती है । वह श्रमिकों की एकजुटता और उनके उत्थान के लिए इस व्यवस्था का खात्मा जरूरी मानते थे ।

10. बहुत ही कम लोग इस बात को जानते हैं कि बाबा साहेब भारत में सफाई कामगारों के संगठित आंदोलन के जनक भी थे । उन्होंने बम्बई और दिल्ली में सफाई कर्मचारियों के कई संगठन स्थापित किए। बम्बई म्युनिसिपल कामगार यूनियन की स्थापना बाबा साहब ने ही की थी ।

इन तमाम कामों और प्रयासों के बावजूद भी विडंबना ये है कि अम्बेडकर को आज के दिन याद नहीं किया जाता । मज़दूर दिवस को आज भी एक खास विचारधारा से ही जोड़कर देखा जाता है । यही वजह है कि भारत में मज़दूर दिवस के मायने समय के साथ सीमित हो चुके हैं । आज जरूरी है कि किसी खास विचारधारा से प्रेरित होकर मज़दूर दिवस को देखने की बजाय यह देखा जाय कि भारत में मज़दूरों का वास्तविक हितैषी कौन था । वह कौन था जिसने न सिर्फ उनके हक की बात की बल्कि उसके लिए ठोस काम भी किया । इस मायने में भारत में अम्बेडकर के आगे कोई भी नहीं ठहरता । आज कोई चाह कर भी उन्हें नज़रंदाज़ नहीं कर सकता है । 

इसीलिए भारत में मज़दूर दिवस बगैर बाबा साहेब को याद किये और बिना उन्हें धन्यवाद दिए अधूरा है ।

Monday, 29 April 2019

चुंकृति

एक पंछी नवांगतुक बोल रहा है, हे गुरुवर!
कितने ही पंछी शब्द हैं पाये, मुझे भी दो वर।
मधुर मोहक चुङ्कृति छेड़ूं हर-भोर  हर-घर,
सर्वत्र फुदकूं हो चाहे मंदिर मस्जिद गिरजाघर ।।

मैंने भी है प्यार किया, बसा लिया मैने भी घर,
मेरी बीबी पेट से हुई, बनाना है मुझे अपना घर।
एक आरा उधारी में दे दो, भटक रहा हूँ दर-दर,
निकलेंगे चूजे जब अंडों से झंकृत हो उठेगा घर।।

मानता हूँ कुछ तिनके बिखरेंगे तुम्हारे आँगन में,
कुछ कुतरन, कुछ बीट और कुछ होंगे हमारे पर।
पानी पीऐंगे घिनौची का और दाने कुछ आंगन के
पर वादा है मेरे बच्चे भी फुदकैंगे तुम्हारे ही घर।।

मैं भी वही हूँ, हो जो तुम और तुम्हारे अपने भी,
एक ही है अम्बर छत तुम्हारी, है वही मेरा भी घर।
जिस हवा से हैं ज़िन्दा हम, हो उसी से तुम भी,
है एक-सा दाना-पानी हमारा और आपका गुरुवर!।।

तप रहा है सूर्य सिर पर और खुले में कौओं का डर,
मौसम आंधी-तूफानों का है और ओलावृष्टि का डर।
बच्चे-बीबी के साथ सुरक्षित रहना चाहूँ मैं तुम्हारे घर,
शरण दो, शरण दो, शरण दो, शरण दो हे गुरुवर!।।

प्रेमनारायण द्विवेदी

प्रजातंत्रे तु वैषम्यं विनाशायैव केवलम्।
अतः समत्वमादेयं जनैः प्राणपणैरिह।। कविः प्रेमनारायणद्विवेदिः

Tuesday, 23 April 2019

कली

मधूक-सी मादकता धरे और नव पल्लव सी सौम्यता,
ऐ मधुचोर भँवरे! उड़ायी कली कहाँ से तूने, ये बता।

मधूक-सी मादकता धरे और नव पल्लव सी सौम्यता,
ऐ मधुचोर भँवरे! उड़ायी कली कहाँ से तूने, ये बता।
खैर खुशी है तव खोज पूरी हुई अब मंडराना है मना,
दाम्पत्य सुख सदा स्रवित होगा, मित्र की शुभकामना।

Jai bhim sayari

Jai bhim shayari hindi


कुरान कहता है मुसलमान बनो
बाइबल कहता है ईसाई बनो
भगवत गीता कहती है हिन्दू बनो
लेकिन मेरे बाबासाहेब का
संविधान कहता है मनुष्य बनो
आंबेडकर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं


नींद अपनी खोकर जगाया हमको
आँसू अपने गिराकर हँसाया हमको
कभी मत भूलना उस महान इंसान को
जमाना कहता हैं “बाबासाहेब आंबेडकर” जिनको
आंबेडकर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं


जय भीम हिंदी शायरी

जब भीम थे चलते तो हजारों दिल मचलते
भीम जब रुकते तो तूफ़ान है रुक जाते
इतने काबिल थे बाबा की कभी इरादा न बदला
बाबा भीम ने तो सारा इतिहास बदल डाला.


ममता,करणा और समता जिसका है आधार हमारी उजाड़ी जिन्दगी में ला डी बाबा साहेब ने बहार हमारी आजादी की कहानी लिखी हमारे भीम ने खुशियों भरा सजाया हमारा संसार भीम ने.


मेरे भीम ने आँख खोली‚हर कोई ईन्सान बन गया।
मेरे भीम ने जुबाँ खोली‚हर कोई तुफान बन गया।
मेरे भीम ने किताब खोली‚हर कोई विद्वान बन गया।
मेरे भीम ने कलम खोली‚ और इस देश का संविधान बन गया।
अरे, इस संविधान की वजह से चाय बेचनेवाला आज प्रधानमंत्री हो गया.


हर अपने को #जयभिम कहना यहीं आदत हैं मेरी
ये ” शान “ये ” शौकत ” औ रये ” ईमान ” न होता।
☝ आज कोई इस देश मेंकिसी का ” मेहमान ” न होता!
☝ नहीँ मिल पाती ” खुशियां “हमे इस वतन में।
????अगर इस देश का संविधान✍” बाबा साहेब ” ने लिखा न होता।।


Monday, 22 April 2019

कौआ

कांव कह कर कागा कहे कागी को,
कोई कहे कर्कश कौआ कोई काना।
कोयल के कण्ठ को कहते कामुक,
कौन किसके कर्मों का कायल होता?

मैं कौआ, सुरीली कोयल का पालन हार,
मैं कौआ, बैठ मंगरे पै, मायके भेजन वार,
मैं कौआ, कनागत पुरखों का तारन हार,
मैं काकचेष्टा का उपदेशक हूँ रंग न निहार।

Monday, 15 April 2019

Hum Yuva

हम युवा हृदय से कि हम युवा बुद्धि प्रखर हम युवा पुंज प्रकाश के आओ चलें शिखर हम बुद्ध वंशज हैं बाहुबल में अशोक महावीर हम रामानुज के बंधु हैं कलाम के सतवीर हम अंबेडकर के अनुगामी गांधी के रणधीर हम पालक संविधान के भारत के संपूरक वीर हम जमीन पर नजर आसमां पर कदम सागर तीर हम ना झुकेंगे ना रुकेंगे देंगे आसमां चीरे हम युवा पीढ़ी देश की हम युवा बुद्धि प्रखर हम युवा पूंजपुर जाकर आओ चलें शिखर