Sunday, 10 February 2019

कलाकार

वाह रे कलाकार! क्या भ्रम थमाया है तूने, लगा बैठता है कलेजे से इंसान भला उसे, छीन लेता है वापस उसे रम जाता है जब वह उसमें, रह जाता है वह भी वैसा ही जैसा आया था इस सागर तट पर।