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विष्णुपुराण (प्रथम स्कन्ध, अध्याय 19, श्लोक 41)
भारतीय इतिहास में मुक्तिविद्यया प्राप्यते तेजः
ॐ ईशावास्यमिदँ सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥1
यस्तु सर्वाणि भूतानि आत्मन्येवानुपश्यति।
सर्वभूतेषु चात्मानं ततो न विजुगुप्सते ॥6
मेवाड़ के प्रसिद्ध शासक राणा सांगा(संग्राम सिंह) 1482ई. 1528ई.
बेटे-7सिंह- भोजराज, कर्ण, रत्न, कर्ण, विक्रमादित्य, उदय, पर्वत, कृष्ण
सबसे बड़े पुत्र भोजराज सिंह सिसोदिया(1495-1526) की पत्नी मीराबाई थीं।
भोजराज और मीराबाई का विवाह मेवाड़(चित्तौड़गढ़) में हुआ था, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही उनका निधन हो गया था। मीराबाई के सांसारिक पति भोजराज, वास्तविक पति के रूप में भगवान कृष्ण को ही मानती थीं।
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।
जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई,
तात मात भ्रात बंधु, आपणो न कोई।
राणाजी थें ज़हर दियौ म्हे जाणी।
जैसे कंचन दहत अगिन में निकसत बारह बाणी।
लोक लाज कुल काण जगत की दई बहाय जसपाणी॥
अपने घर का परदा कर ले मैं अबला बौराणी।
तरकस तीर लग्यो मेरे हियरे गरक गयो सनकाणी॥
सब संतन पर तन मन वारों चरण कँवल लपटाणी।
मीरा को प्रभु राखि लई है दासी अपणी जाणी॥
मीराबाई के देवर विक्रमादित्य (राणा) ने जहर का प्याला भेजा था, जो उन्हें मारना चाहते थे क्योंकि वे मीराबाई की कृष्ण भक्ति और उनके ससुराल वालों के प्रति अनादर को बर्दाश्त नहीं कर पाते थे; हालाँकि, मीराबाई ने उसे हंसकर पी लिया और भगवान श्री कृष्ण की कृपा से उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ, और वे उस विष को प्रसाद मानकर पी गईं।
"गुरु मिल्या रैदास जी
दीनी ज्ञान की गुटकी,
चोट लगी निजनाम हरी की
महारे हिवरे खटकी"
मीरा के पति की मृत्यु 'रण मुक्ति'
मीरा की मुक्ति 'तरण मुक्ति'
मीरा के गुरु की मुक्ति 'आचरण मुक्ति'
"ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिलै सबन को अन्न।
छोट-बड़ो सब सम बसै, रैदास रहे प्रसन्न।।"
बेगम पुरा शहर कौ नांउ, दुखू अंदोह नहीं तिहिं ठांउ।
नां तसवीस खिराजु न मालु, खउफु न खता न तरसु जवालु॥
न हि वेरेन वेरानि..
अब मोहि खूद वतन गह पाई, ऊंहा खैरि सदा मेरे भाई।
काइमु दाइमु सदा पातसाही, दोम न सेम एक सो आही॥
आबादानु सदा मसहूर, ऊँहा गनी बसहि मामूर।
तिउ तिउ सैल करहि जिउ भावै, महरम महल न कौ अटकावै।
कहि रैदास खलास चमारा, जो हम सहरी सु मीत हमारा॥
आक्रामकता के आघात
स्थापत्य
3500 साईट्स
कम्बोडिया मंदिर
भवन बनाने वाला, अछूत हो गया।
हड़पन ईंट
ईंट बनाने वाला अछूत हो गया
1920-24 हड़प्पा खोज
एलोरा कैलाश नाथ मंदिर
जल प्रबंधन
धीवर पिछड़ गया
दुर्जन तालाब चन्द्र गुप्त मौर्य
रानी की बाव-
धातु विज्ञान 1600 वर्षों से टोपरा पिलर
गणित वैदिक
लिपिकार
तर्क करने पर विधर्म हो गया।
ज्योतिषीय
गुरुत्वाकर्षण भास्कराचार्य सिद्धांत -
चिकित्सा विज्ञान - जच्चा बच्चा मरते रहे।
भारत प्लास्टिक सर्जरी-
नाक कटने का मिथक-
Ag. 1794
कांगड़ा काननाक सर्जरी
ऐतरेय उपनिषद्
दिशा जानने की क्षमता भागवत् में
प्रकृति और ब्रह्मांड
चेहरे पर..
गर्दो मलाल है।
सोमनाथ हमले पर मंत्र फेल क्यों हो गये?
सूर्पनखा की नाक क्यों नहीं जुड़ सकी?
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