Sunday, 22 March 2026

दशरथ जातक

भगवान राम, भगवान बुद्ध के पूर्वज थे

जातक कथाओं में बुद्ध के पिछले जन्म के वर्णन मिलते हैं। दशरथ जातक, एक जातक कथा है जो पाली में सुत्त पिटक के खुद्दक निकाय में 461वीं जातक कथा के रूप में पाई जाती है।

कथा इस तरह से है। राम -पंडित अनासक्ति और आज्ञाकारिता नैतिकता से ओत प्रोत राजकुमार है जिसे उसके पिता राजा दशरथ ने बारह साल के वनवास पर इसलिए भेज दिया था क्योंकि दशरथ को डर था कि राज्य के लिए राम पंडित को उसकी सौतेली माँ द्वारा मार दिया जाएगा। राम-पंडित छोटे भाई, लक्खना -कुमार और सीता ने उनका वन जाने में अनुसरण किया। नौ साल बाद ही राजा की मृत्यु हो गई। सौतेली माँ के पुत्र भरत नैतिकता और करुणा की मूर्ति थे उन्होंने राज्याभिषेक करने से इनकार कर दिया; क्योंकि अधिकार उसके बड़े भाई का है। वे राम पंडित और अन्य दो की तलाश में गए जब तक कि वे नहीं मिल गए, और तीनों को उनके पिता दशरथ की मृत्यु के बारे में बताया।

लक्खण-कुमार और सीता दोनों पिता की मृत्यु का दुःख सहन नहीं कर सके, लेकिन राम चुप थे। उन्होंने कहा, दुःख तो अपने मृत पिता को वापस नहीं ला सकता, फिर दुःख किस बात का? सब कुछ अनित्य है. सभी श्रोता दुःखी हो गये। उन्होंने अपने पिता के प्रति अपना वचन निभाने के लिए उस समय राज्याभिषेक करने से इनकार कर दिया (क्योंकि उनका निर्वासन पूरा नहीं हुआ था) और इसके बदले राज्य पर शासन करने के लिए अपनी पादुकाएं दे दीं। निर्वासन के बाद, बोधिसत्व राज्य लौट आए और सभी ने इस कार्यक्रम का जश्न मनाया। फिर उसने 16,000 वर्षों तक बहुत बुद्धिमानी से राज्य पर शासन किया। 

इस कथा में बुद्ध कहते हैं, सीता राहुल की मां, शुद्धोधन दशरथ, आनंद भरत और मैं यानी बुद्ध पिछले जन्म में राम था।

इसी तरह अनामक जातक में भगवान राम का वनवास, सीता हरण, बंदरों की सेना, रावण वध का उल्लेख किया गया है। रही बात अभिलेखित प्रमाण की तो कौशांबी में मिला प्रस्तर अभिलेख जो दूसरी शती ईस्वी पूर्व का है, उसमे अंकित है कि 
कौशाम्बी के गृहपति इन्द्रघोश ने अपनी पत्नी के साथ भगवान राम की उपासना की थी । 

इंडोनेशिया से इराक तक, चीन से माया सभ्यता तक राम रमण कर रहे हैं।

नव बौद्ध राम को बुद्ध के बाद का मिथकीय चरित्र बताते हैं जबकि जातक कथाएं बुद्ध के अनुसार उनके पूर्व की कथाएं हैं। नव बौद्ध, भगवान बुद्ध की बात भी नही मानते।  

मानसिक रूप से मतिमंद लोगों पर दया आती है।


बौद्ध ग्रंथों में 28 बुद्धों का उल्लेख है, जो गौतम बुद्ध सहित पूर्व बुद्ध माने जाते हैं। बुद्ध ने पुनर्जन्म (पुनर्भव) में विश्वास किया, लेकिन स्थायी आत्मा को नकारा; यह कर्म-प्रवाह पर आधारित है। दशरथ जातक में राम को बोधिसत्व (भविष्य के बुद्ध) बताया गया है।

28 बुद्धों का स्रोत
यह वर्णन त्रिपिटक के खुद्दक निकाय में 'बुद्धवंश' (Buddhavamsa) में मिलता है। गौतम बुद्ध ने स्वयं अपने पूर्व बुद्धों (जैसे दीपांकर, कश्यप आदि) का उल्लेख किया, जो विभिन्न कल्पों में अवतरित हुए। यह 28 बुद्धों की परंपरा दर्शाता है।

पुनर्जन्म और बुद्धत्व
बुद्ध अनात्म (no-self) सिद्धांत पर जोर देते थे, फिर भी पुनर्भव को स्वीकार किया—कर्म और चेतना की निरंतरता के रूप में, न कि आत्मा के। बुद्ध पदवी या अवस्था है, जो सम्यक् ज्ञान प्राप्त व्यक्ति को मिलती है; इसलिए 28 पूर्व बुद्ध संभव।

रामायण से भिन्नताएँ
रामायण: दशरथ अयोध्या के राजा; सीता जनक की पुत्री व राम की पत्नी; 14 वर्ष वनवास; रावण अपहरण।

दशरथ जातक: दशरथ वाराणसी राजा; सीता दशरथ की पुत्री (राम की बहन); कोई रावण/हनुमान/युद्ध नहीं; मात्र 12 वर्ष वनवास।
दशरथ जातक में राम (बोधिसत्व) का अंत सुखद और राजपाट के साथ होता है। यह रामायण के युद्ध-पूर्ण अंत से भिन्न है।



जातक कथा लोगों को मोरल शिक्षा देने के लिये ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से लेकर हर्षवर्धन काल तक लिखा गया। जिसमें पक्षी,जानवर और मनुष्य को आधार बनाया गया।मुख्य पात्र को पूर्व जन्म बुद्ध को इस जन्म का बौद्धिसत्व बताया गया।ताकि लोग बुद्ध का कहानी समझे।इस दशरथ जातक कथा का मूल संदेश था जीवन और मृत्यु एक सत्य घटना है। इसलिए मृत्यु पर शोक नहीं करना चाहिए।इसी दसरथ जातक कथा का विस्तरित रुप रामायण है।यह कथा है।इसका इतिहास से कोई लेना देना नहीं है।बुद्ध ने कभी पुनर्जन्म का बात नहीं किए हैं।जिस तरह की पुनर्जन्म की मान्यता हिन्दू धर्म में है।


फिर अठाईस बुद्ध कौन थे।बुद्ध से पहले सात बूद्ध का तो आर्कियोलॉजिकल प्रमाण है।बुद्ध कोई धर्म के जनक नहीं थे।वो धम्म प्रवर्तक थे। इसलिए उन्हें धम्म चक पवतक कहा जाता है।


ये भाई कथा समझते हो क्या होती है. एक कहानी इसमें राम बौद्ध सत्व है वैदिक राम नहीं इसमें शीता राम की बहिन है पत्नी नहीं. और जातक पढोगे तो हनुमान भी मिलेगे बानर जातक में. और लंका अवतार सुत्त जातक में रावण भी मिलेगा इन जातको की कहानियाँ जोड़ दीजिये रामायण बन जायेगी. लेकिन इन जातको में सभी किरदार बुद्ध के अनुयाई है

जातक कथाएं बहुत सारी हैं जो बुद्ध के कई सौ साल बाद बनाई गई, दान और त्याग की कहानियां दर्शाने के लिए उदाहरण के तौर पर

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