Saturday, 14 March 2026

क्या आपको कभी हैरानी नहीं होती की वर्तमान पौराणिक हिंदू समाज, बौद्ध संस्कृति के विरोध में खड़ा है अपशब्द (गाली) का प्रयोग करता है ?
 शब्दों पर गौर करिए 
बुद्ध से ..बुद्धू 

जहां बुद्ध को बोध(ज्ञान)आया, उसका नाम... बोध गया
पीपल के नीचे बुद्ध को ज्ञान मिला तो पीपल पर भूत रहते हैं (बुद्ध ने आत्मा प्रेत ईश्वर को नकारा इसके विरोध में मृतक आत्माओं के लिए घड़े बांधते हैं)

देवनामप्रिय (अशोक के लिए) जिसका अर्थ मूर्ख 

वैशाख नंदन (शाक्य मुनि बुद्ध) जिसका अर्थ गधा

 सालभंजिका (बुद्ध की मां) संस्कृत में अर्थ वेश्या

 सील से (स्त्री अपमानजनक) शीलभंग 

भद्र से भदरा (पंचांग के अनुसार अशुभ घड़ी भद्रा)

भंते से भद्दा 

(जैन मुनि केश लोचन करते हैं नग्न रहते हैं उनके लिए शब्द नंगा लुच्चा..)

नाथ पंथी सम्यक/श्रमण (बौद्ध)परंपरा से हैं गोरखनाथ के लिए गोरखधंधा 

कबीर के लिए (बचपन में होली में अक्सर सुनता था) कबीरा सर र ...र 

योगी गोरख के लिए जोगीरा सा रा ..रा र

बाल्मीकि रामायण में बुद्ध के लिए अपशब्द/गाली

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