उन भाट-बीरबलों के साथ लड़े।
मूलनिवासी दमन सहकर भी
मुगलों के सालों के साथ लड़े।
कब तक लड़ेगा उन लोंगों से,
सहकर भी तेरे साथ खड़े।
आँख खोल अपमान छोड़,
लक्ष्य, भारत एक साथ बड़े।
तिरस्कार अकेला कर देता,
सत्कार अपनापन भर देता।
दुर्योधन-द्रोण पन छोड़ भैय्या,
सोचो कैसे सब एक साथ बड़े?
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