Saturday, 25 April 2026

आवेशावतार परशुराम

आप तो विद्वान है प्रभु। आवेश यो क्षणिक होता है फिर चिरंजीवी भगवान परशुराम आवेशावतार कैसे हो गये ? नृसिंह भगवान को तो आवेशावतार कहा जा सकता है किन्तु पूरी पृथ्वी पर गौ, ब्राह्मण और देव निंदक सहसभुज तथा उसके समर्थकों का समूल नाश करने वाले, भगवान राम तथा कृष्ण को सारंग धनुष तथा वज्रनाभ नामक चक्र सुदर्शन प्रदान कर उन्हें विष्णुजी के पहिचान चिन्ह सौंपने वाले, गुरु द्रोण, भीष्म, कर्ण, बलदाऊ आदि के आचार्य गुरु, भगवान भोलेनाथ के एकमात्र शिष्य, अपने पराक्रम से समुद्र को सर्वदा के लिए पीछे धकेलकर मर्यादित करने वाले, कलियारपट्टू नामक एकल युद्ध विद्या के आविष्कारक, अत्रि की पत्नी अनुसूया एवं अगस्त की पत्नी लोपमुद्रा के साथ एकल विवाह का अभियान चलाने वाले, ब्रह्म पुत्र एवं राम गंगा नदियों को पृथ्वी पर लाने वाले आज भी उडीसा के गजपति जिले के महेन्द्रगिरि पर्वत पर तपस्यारत रत भगवान कलि के आचार्य बनने वाले भगवान को आवेशावतार कैसे कह सकते हैं ?

No comments:

Post a Comment