Wednesday, 6 November 2019

मोबलिंचिंग

हवा बनी है
मौके पर निर्णय
मोबलिंचिंग।

मोबलिंचिंग
मौके पर निर्णय
विद्यालयों में।

मोबलिंचिंग
मौके पर निर्णय
अस्पतालोंमें।

मोबलिंचिंग
मौके पर निर्णय
न्यायालयों में।

मैं ही थाना
वकील हम ही हैं
हाल निर्णय।

आग लगा दी
देश जल रहा है
धिक् धिक् नेता जी।

धर्म रक्षा है
तत्काल न्याय करो
धर्मोपदेश है?

उन्मादी भीड़
विवेक शून्य सब
खून बहाते।

धर्म युग है?
सत्ता ही सत्य हुआ
ख़बरी भक्त।

👉रामहेत गौतम

Tuesday, 5 November 2019

वृद्धशासनं

परिवारजनानां नु वक्रोक्तिं सहते सदा।
सः यः धारति गेहे स्वे वृद्धपदस्य शासनम्।।

Sunday, 3 November 2019

अम्बेडकर चाहिए

राम लक्ष्मण नहीं.....अम्बेडकर चाहिए।
मनुस्मृति नहीं.....संविधान चाहिए।
धर्म नहीं.....अधिकार चाहिए।
मन्दिर नहीं.....स्कूल चाहिए।
भगवान नहीं.....विज्ञान चाहिए।
भाषण नहीं.....रोजगार चाहिए।
पूंजीवाद नहीं.....समाजवाद चाहिए।
धर्मतन्त्र नहीं.....लोकतंत्र चाहिए।
असमानता नहीं.....समानता चाहिए।
अनेकता नहीं......एकता चाहिए।
अन्याय नहीं.....न्याय चाहिए।
भीख नहीं.....हक चाहिए।
गुलामी नहीं.....आज़ादी चाहिए।
जय भीम जय संविधान जय मूलनिवासी।
🙏🙏🙏

भवालकर जयन्ती

ऋतु वसन्त विकसित वनमाला
सुरभित समीर सुरम्य सुथार
राधावल्लभ जनमत वाला
अवतरणोत्सव आनन्द अपार।

Saturday, 2 November 2019

चार लघु स्तंभ लेख - 4 ( सांची )

🌹चार लघु स्तंभ लेख - 4🌹
                           ( सांची )

🌹
मूल-लेख (लिप्यांतरण):-

१ .................

२ . . . या भेतवे . . . ' . . .संघे . . . मगे कटे

३ भिखूनं च भिखुनीनं चा ति पुत - प

४ पोतिके चंदम सूरियिके ये संघं

५ भाखति भिखु वा भिखुनि वा ओदाता-

६ नि दुसानि सनंघापयितु अनावा 

७ ससि वासापेतविय इछा हि मे किं -

८ ति संघे समगे चिल - थितीके सिया ति

-                  -                  -                 -

🌹
अनुवाद -

. . . . . . .भेद नहीं हो सकता . . . भिक्खुओं और भिक्खुणियों का संघ , जब तक ( मेरे ) पुत्र पौत्र ( राज्य करेंगे ) सूर्य और चंद्र में प्रकाश होगा , समग्र रहेगा ।
जो भी भिक्खु या भिक्खुणी संघ का भेद करे उसे श्वेत वस्त्र पहनाकर विहार से बाहर अनावास में रखा जाय ।
मेरी क्या इच्छा हो सकती है ? कि -
संघ समग्र ( अखंड ) रहे और चिरस्थायी हो ।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

चार लघु स्तंभ लेख - 3 ( रानी का लेख )( कौशांबी )

🌹चार लघु स्तंभ लेख - 3🌹
                    ( रानी का लेख )
                       ( कौशांबी )              

🌹
मूल-लेख (लिप्यांतरण):-

१ देवानंपियषा वचनेना सवत महमता

२ वतविया ए हेता दुतियाये देवीये दाने

३ अंबा-वडिका वा आलमे व दान - गहे व ए वा पि अंने

४ कीछि गनीयति ताये देविये षे नानि हेवं . . . .
   . [ न ] . . . . (विनती)

५ दुतीयाये देविये ति तीवल - मातु कालुवाकिये

-                  -                  -                 -

🌹
अनुवाद -

देवानंपियषा वचनेना सवत महमता
(देवानंपिय के वचन से सभी महामातों से इस प्रकार कहना) -
जो भी दान दूसरी रानी यहॉ देती है, चाहे वह आम की बगीची हो या बाग या दान-गृह या अन्य कोई भी चीज, ये रानी के नाम ही लिखे जायें ।
यह दूसरी रानी, तीवर की माता, कारूवकी की प्रार्थना है ।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

🌹
टिप्पण :
कौसांबी स्तंभ पर लेखों का क्रम इस प्रकार है :
🔸1. वृहद-स्तंभ-लेख: 1 - 6,
🔸2. संघ-भेद करने से रोकता लेख,
🔸3. रानी कारूवकी का लेख ।
तीनों लेख एक ही स्तंभ पर क्रम से लिखे हैं ।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Friday, 1 November 2019

मार्गः सः एव मे

धर्मः सः एव यत्र मानवसमता भवेत्।
रक्षा-मान-समृद्धिभ्यःद्वारमसवृतं तथा।।
रामहेत गौतमः