Sunday, 28 June 2026

हरिजन

रामचरितमानस के अनुसार हरिजन का आशय ब्राह्मणों से है। प्रमाण के लिए देखें गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित रामचरितमानस के उत्तर काण्ड का दोहा 105 (क) जिसमें काकभुशुण्डी कहते हैं कि-
मैं खल मल संकुल मति नीच जाति बस मोह।
हरिजन द्विज देंखें जरउँ करउँ बिष्नु कर द्रोह।।

द्विज = ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य 
हरिजन = हरि(विष्णु)जन(भक्त/सेवक)
'हर कहुँ हरि सेवक' के अनुसार शिव भी हरिजन हैं।
इस प्रकार हरिजन द्विज का तात्सर्य हुआ ऐसा द्विज जो विष्णुभक्ति में सर्वश्रेष्ठ हो।जो कि वर्ण-व्यवस्था का शीर्ष वर्ण ही है।
अतः बुरा न मानकर उन्हें समझाएं कि आप सही जगह उच्चारण करें।